पंजाब लेखक संघ, जालन्धर द्वारा आयोजित संगोष्ठी

डॉ. विनोद कुमार के कविता-संग्रह का विमोचन

सभ्यता के प्रारंभ से ही पंजाब की धरती सृजनशील रही है। हिंदी साहित्य की समृद्धि में यहाँ के रचनाकारों के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। डॉ. विनोद शर्मा उन रचनाकारों में से एक हैं जिनका स्वयं का जीवन संघर्षों का उदहारण है। इनकी रचनाधर्मिता सही अर्थों में संघर्षों की बानगी है। जिस समय हम संघर्ष के साथ-साथ की कविताएँ पढ़ते हैं सही अर्थों में अपने समय और समाज को देख रहे होते हैंÓÓ यह कहना था हिंदी-विभाग, पंजाब विश्वविद्यालय से आए डॉ. अशोक कुमार का जो कार्यक्रम में  बतौर सारस्वत अतिथि उपस्थित थे।3 फरवरी, 2019 को पंजाब लेखक संघ, जालंधर द्वारा डॉ. विनोद कुमार शर्मा के काव्य-संग्रह 'संघर्ष के साथ-साथÓ का लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर प्रोफेसर सुधा जितेन्द्र ने विवेच्य पुस्तक पर अपना विचार रखते हुए कहा कि ''कविताएँ मरती नहीं कभी। समय के साथ परिवर्तित होते समाज की दशा-दिशा निर्धारित करने में कविताओं का अहम योगदान होता है। हमें यह कहते हुए कोई संकोच नहीं है कि डॉ. विनोद कुमार की यह पुस्तक हमारे समय और समाज को दिशा देने में सक्षम है।''डॉ. शशि कुमार के अनुसार संघर्ष के साथ-साथ संग्रह में हमारे वर्तमान के यथार्थ को तो देखा ही जा सकता है आदर्श और अध्यात्म की समन्वयात्मक प्रवृत्ति को भी गहरे में परखा जा सकता है।  ''डॉ. विनोद कालड़ा ने अपने प्रपत्र में लेखक की रचनाधर्मिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ''विनोद कुमार की कविताएँ हमारे समय का आख्यान हैं। यहाँ यथार्थ जितनी गहराई के साथ वर्तमान है, दर्शन पक्ष उतनी ही गहराई के साथ प्रेरित करता है। भक्ति पक्ष के साथ-साथ देश में चल रही वर्तमान राजनीतिक एवं सामाजिक विसंगतियों पर भी कटाक्ष देखने को मिलता है।  ''डॉ. तरसेम गुजराल ने अपने वक्तव्य में पुस्तक में व्याप्त जनधर्मी परम्परा का रेखांकन किया तो राकेश शांतिदूत ने कवि की लोकधर्मी परम्परा को अभिव्यक्ति दी। श्री सोहन कुमार ने कविता की अनिवार्यता को लेकर अपनी बात रखी।वरिष्ठ पत्रकार सिमर सदोष ने विनोद कुमार को कवि के रूप में जरूरी हस्तक्षेप बताते हुए कहा कि ''विनोद कुमार सृजनशील व्यक्तित्व हैं। संवेदनशील हृदय से निकली अभिव्यक्ति समाज को सही दिशा देती है। '' इसके पहले बीज वक्तव्य के रूप में बोलते हुए अनिल कुमार पाण्डेय का कहना था कि ''कविताएँ कभी मरती नहीं हैं। जीवन है तो कविता है कविता है तो मनुष्य है।मनुष्यता की यात्रा कविता की यात्रा है। इसलिए जब हम विनोद शर्मा द्वारा सृजित इस संग्रह पर बात करें तो यह जरूरी हो जाता है कि कविता के कुछ विमर्श-बिन्दु निकलकर सामने आएं।ÓÓ पूर्व मेंडॉ. विनोद शर्मा ने अपने कविता-संग्रह में से कविताओं का सस्वर पाठ किया।  अपने अध्यक्षीय भाषण में डॉ. हुकुमचन्द राजपाल और श्री सुरेश सेठ ने कहा कि डॉ. विनोद कुमार की रचनाओं में वैदिक संस्कृति के प्रति श्रद्धा भी दिखाई देती है। और सामाजिक विषमताओं के प्रति आक्रोश भी दिखाई देता है।उन्होंने यह भी कहा कि संघर्ष के साथ-साथ अपने समय की संस्कृति और सामाजिकता का चित्र भी प्रस्तुत हुआ है। निश्चय ही यह काव्य-संग्रह शाश्वत स्वस्थ परम्परा को बढ़ाने वाला प्रयास है। अतिथियों का स्वागत संयोजक प्रो. मोहन सपरा ने किया और धन्यवाद ज्ञापन संयोजक डॉ. अजय शर्मा द्वारा दिया गया।कार्यक्रम का संचाालन अनिल कुमार पाण्डेय ने किया। इस अवसर पर शहर के अन्य रचनाकारों की भी उपस्थिति बनी रही जिसमें, सर्वश्री दीपक बाली, डॉ. जे.सी. जोशी, डॉ. देवेन्द्र बिमरा, सरिता तिवाड़ी, डॉ. नीरज शर्मा, डॉ. गीता डोगरा, डॉ. कीर्ति केसर, रमेश विनोदी, बलविन्दर अत्री, रमण शर्मा, रीना शर्मा, कमलेश आहूजा, बिशन सागर, सन्दीपिका सपरा तथा सुनील कुमार, जसप्रीत कौर फलक आदि उपस्थित रहे। 

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